पाठ्यक्रम: जीएस-3/ ऊर्जा अवसंरचना; पर्यावरण
सन्दर्भ
- भारत में ई-गतिशीलता (eMobility) तीव्र गति से विकसित हो रही है और विद्युत वाहन (Electric Vehicles–EVs) आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा तथा स्वच्छ भविष्य के प्रमुख प्रेरक के रूप में उभर रहे हैं।
इलेक्ट्रिक वाहन (EV) क्या है?
- विद्युत वाहन (EV) वह वाहन है जो बैटरी में संग्रहीत ऊर्जा से संचालित विद्युत मोटर द्वारा चलता है। इसकी बैटरी को बाहरी विद्युत स्रोत से पुनः चार्ज किया जा सकता है।
ईवी के चार प्रकार होते हैं:
- बैटरी विद्युत वाहन (Battery EVs–BEVs): ये पूर्णतः विद्युत चालित वाहन होते हैं।
- हाइब्रिड विद्युत वाहन (Hybrid EVs–HEVs) एवं प्लग-इन हाइब्रिड विद्युत वाहन (Plug-in HEVs–PHEVs): इनमें वाहन को चलाने के लिए आंतरिक दहन इंजन (Internal Combustion Engine–ICE) तथा विद्युत मोटर दोनों का उपयोग किया जाता है।
- PHEVs में अतिरिक्त रूप से बाहरी स्रोत से चार्ज की जा सकने वाली बैटरी होती है, जिससे वाहन लंबे समय तक केवल विद्युत ऊर्जा पर चल सकता है।
- ईंधन सेल विद्युत वाहन (Fuel Cell EVs–FCEVs): इनमें विद्युत ऊर्जा का उत्पादन रासायनिक ऊर्जा से किया जाता है।
विद्युत वाहन क्यों हैं एक बेहतर विकल्प?
- कम लागत: ईंधन पर कम खर्च तथा रखरखाव की न्यूनतम आवश्यकता।
- पर्यावरण के अनुकूल: शून्य टेलपाइप उत्सर्जन तथा कम कार्बन पदचिह्न (Carbon Footprint)।
- कर लाभ: कम पंजीकरण शुल्क एवं सरकारी प्रोत्साहनों के माध्यम से बचत।
- आसान संचालन: गियर या क्लच की आवश्यकता नहीं; केवल एक्सेलरेशन और ब्रेकिंग से वाहन का संचालन।
- घर पर चार्जिंग: घर एवं सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों पर चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध।
- शोररहित यात्रा: विद्युत वाहन में इंजन नहीं होता, बल्कि बैटरी से संचालित मोटर प्रणाली होती है, जिससे यह अत्यंत शांत चलता है।
भारत की ईवी क्रांति का पिछले दशक का सफर
- भारत की विद्युत गतिशीलता की यात्रा 2015 में राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन योजना (National Electric Mobility Mission Plan) तथा फेम (FAME) योजना के शुभारंभ के साथ शुरू हुई, जिसका उद्देश्य ईवी अपनाने को प्रोत्साहित करना था।
- यह पहल पेट्रोलियम ईंधन के बढ़ते आयात बिल को कम करने तथा शहरी वायु प्रदूषण से निपटने जैसी स्पष्ट रणनीतिक प्राथमिकताओं से प्रेरित थी।
- इसका उद्देश्य परिवहन क्षेत्र से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना था, जो भारत के कुल उत्सर्जन का लगभग 9% है।
भारत में ईवी अपनाने की स्थिति
- भारत में ईवी अपनाने में कई गुना वृद्धि हुई है और यह वित्तीय वर्ष 2015-16 के 0.08% से बढ़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में 8.26% हो गया।
- इस वृद्धि में वर्ष 2025 में बेचे गए 12.8 लाख मोटर चालित दोपहिया तथा 8 लाख तिपहिया वाहनों का प्रमुख योगदान रहा।

- ईवी निर्यात 2020 में 12 लाख अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024 में 8.4 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो गया। प्रमुख निर्यात गंतव्यों में नेपाल, इंडोनेशिया और जापान शामिल रहे।
- 2025 में उत्तर प्रदेश 4 लाख से अधिक ईवी की बिक्री के साथ देश का सबसे बड़ा ईवी बाज़ार बनकर उभरा, जो राष्ट्रीय ईवी बिक्री का 18% था।
- इसके बाद महाराष्ट्र (2.66 लाख इकाइयाँ; 12%) तथा कर्नाटक (2 लाख इकाइयाँ; कुल बिक्री का 9%) का स्थान रहा।
- विस्तारित अवसंरचना: भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के अनुसार, जुलाई 2026 तक देश में उपलब्ध 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में से 16,561 तेज़ (Fast) ईवी चार्जिंग सुविधाओं से सुसज्जित हैं।
- ई-अमृत (e-Amrit) उपकरण उपयोगकर्ताओं को उनके स्थान के आधार पर निकटतम चार्जिंग स्टेशन खोजने में सहायता करता है।
भविष्य की संभावनाएँ
- वर्ष 2025 में 3.71 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य वाला भारत का ईवी बाज़ार 2034 तक 191.04 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है, जिसकी चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 54.94% रहने की संभावना है।
- भारत ने 2030 तक सभी वाहन बिक्री में 30% हिस्सेदारी विद्युत वाहनों की करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जो वैश्विक EV30@30 पहल के अनुरूप है।
- वर्ष 2030 तक पूरे भारत में 13.2 लाख (1.32 मिलियन) चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना के साथ देश का ईवी पारिस्थितिकी तंत्र और अधिक सुदृढ़ होने की अपेक्षा है।

भारत में विद्युत वाहनों (EVs) से जुड़ी प्रमुख चिंताएँ
- उच्च प्रारंभिक लागत: विद्युत वाहन अभी भी पारंपरिक पेट्रोल/डीज़ल वाहनों की तुलना में अधिक महंगे हैं। बैटरी की लागत कुल वाहन लागत का 35–40% होती है, जिससे ईवी महंगे हो जाते हैं।
- चार्जिंग अवसंरचना का अभाव: विशेषकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता सीमित है।
- रेंज एंग्जायटी (Range Anxiety): अनेक उपभोक्ताओं को चिंता रहती है कि लंबी दूरी की यात्रा के लिए ईवी की बैटरी पर्याप्त नहीं होगी। चार्जिंग स्टेशनों की कमी इस चिंता को और बढ़ाती है।
- बैटरी का जीवनकाल एवं प्रतिस्थापन लागत: समय के साथ बैटरी की क्षमता में कमी आने की चिंता रहती है। साथ ही, बैटरी बदलने की लागत भी अधिक होती है।
- महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता: भारत लिथियम, कोबाल्ट, निकेल तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर निर्भर है।
- आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान आने से बैटरियों की लागत बढ़ सकती है तथा विनिर्माण प्रभावित हो सकता है।
- घरेलू विनिर्माण की चुनौतियाँ: भारत अभी स्वदेशी बैटरी एवं ईवी घटकों के विनिर्माण की क्षमता विकसित कर रहा है।
- बिजली की बढ़ती मांग: बड़े पैमाने पर ईवी अपनाने से बिजली की मांग में वृद्धि होगी।
- इसके लिए विद्युत ग्रिड को सुदृढ़ करने तथा नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता होगी।
- पर्यावरणीय चिंताएँ: यद्यपि ईवी से टेलपाइप उत्सर्जन नहीं होता, लेकिन बैटरी निर्माण एवं उसके निपटान से पर्यावरणीय चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं।
- बैटरी पुनर्चक्रण एवं निपटान: सुरक्षित पुनर्चक्रण अवसंरचना अभी विकासशील अवस्था में है। अनुचित निपटान से पर्यावरण एवं स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
- उपभोक्ता जागरूकता एवं भ्रांतियाँ: अनेक उपभोक्ताओं का मानना है कि ईवी की रेंज बहुत कम होती है, वे सुरक्षित नहीं हैं, उनका रखरखाव कठिन है तथा वे भारतीय परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकते।
- वित्तपोषण एवं बीमा: अधिक प्रारंभिक लागत के कारण ईवी की वहनीयता प्रभावित होती है।
- नीतिगत एवं नियामक चुनौतियाँ: निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता आवश्यक है।
भारत में विद्युत वाहनों हेतु प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप
- राष्ट्रीय विद्युत गतिशीलता मिशन योजना (NEMMP 2020): यह भारत में ईवी को अपनाने तथा उनके घरेलू विनिर्माण को गति देने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत करती है।
- इसका द्वैध उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करना तथा स्वच्छ एवं सतत गतिशीलता को बढ़ावा देना है।
- फेम इंडिया (FAME India): इसे 2015 में NEMMP 2020 के अंतर्गत ईवी अपनाने को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया।
- यह खरीदारों को प्रोत्साहन प्रदान करती है तथा चार्जिंग अवसंरचना एवं विनिर्माण को समर्थन देती है।
- फेज-I मार्च 2019 तक चला, जिसके बाद फेज-II को अप्रैल 2024 तक पाँच वर्षों के लिए लागू किया गया।
- राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन (NMM): यह ईवी को नवाचार-आधारित विकास के प्रमुख ‘सीड सेक्टर’ के रूप में पहचानता है तथा 2035 के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करता है।
- इसका उद्देश्य 2023 के 12.9% से बढ़ाकर 2035 तक विनिर्माण क्षेत्र का जीडीपी में योगदान 25% करना है।
- यह उन्नत विनिर्माण, प्रौद्योगिकी विकास तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में ईवी उत्पादन के एकीकरण को बढ़ावा देकर भारत के ईवी पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करता है।
- नीति आयोग का भारत विद्युत गतिशीलता सूचकांक (India Electric Mobility Index–IEMI): यह अपनी तरह का पहला ढाँचा है, जो राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में विद्युत गतिशीलता की प्रगति का आकलन एवं तुलना करता है।
- यह परिवहन का विद्युतीकरण, चार्जिंग अवसंरचना की तैयारी तथा ईवी अनुसंधान एवं नवाचार—इन तीन स्तंभों के अंतर्गत 16 संकेतकों पर प्रदर्शन का मूल्यांकन करता है।
- अंकों के आधार पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को अग्रणी (Frontrunners), प्रदर्शनकर्ता (Performers) तथा आकांक्षी (Aspirants) श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।
- पीएम ई-ड्राइव योजना (PM E-DRIVE Scheme), 2024: यह भारी उद्योग मंत्रालय (MHI) की एक प्रमुख पहल है।
- इसका उद्देश्य लक्षित मांग प्रोत्साहनों, घरेलू विनिर्माण को समर्थन तथा चार्जिंग अवसंरचना के विस्तार के माध्यम से ईवी अपनाने में तेजी लाना है।
- पीएम ई-बस सेवा–भुगतान सुरक्षा तंत्र (PSM) योजना, 2024: यह प्रत्येक तैनात बस के लिए 12 वर्ष तक भुगतान सुरक्षा प्रदान करती है।
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के माध्यम से 10,000 विद्युत बसें तैनात की जानी हैं।
- भारत में विद्युत यात्री कारों के विनिर्माण को प्रोत्साहन योजना (SPMEPCI), 2024: इसका उद्देश्य विद्युत कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देना है।
- इसके अंतर्गत ₹4,150 करोड़ का न्यूनतम निवेश अनिवार्य है।
- कंपनियों को तीसरे वर्ष तक कम-से-कम 25% तथा पाँचवें वर्ष तक 50% घरेलू मूल्य संवर्धन (Domestic Value Addition–DVA) प्राप्त करना होगा।
- पीएलआई–ऑटो योजना (PLI-Auto Scheme): इसका उद्देश्य ईवी सहित उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकी (Advanced Automotive Technology–AAT) के क्षेत्र में भारत की विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करना है।
- यह कम-से-कम 50% घरेलू मूल्य संवर्धन के साथ घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करती है।
- उन्नत रसायन सेल (ACC) बैटरी भंडारण हेतु पीएलआई योजना: इसका उद्देश्य घरेलू बैटरी विनिर्माण को प्रोत्साहित करना है।
- इसका लक्ष्य भारत में 50 GWh की संचयी ACC क्षमता स्थापित करना है।
- यह बिक्री-आधारित प्रोत्साहनों के माध्यम से उन्नत एवं लंबी दूरी तक चलने वाली ईवी बैटरियों के विकास को बढ़ावा देती है।
- ईवी पर कम जीएसटी: भारत में सभी विद्युत कारों, दोपहिया एवं तिपहिया वाहनों पर 5% की रियायती जीएसटी दर लागू है।
आगे की राह: भारत में ईवी विकास की संभावनाएँ
- भारत कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE) मानकों के अगले चरण—CAFE III (2027–2032) तथा CAFE IV (2033–2037)—को विकसित कर रहा है।
- इनमें विश्वव्यापी समन्वित हल्के वाहन परीक्षण प्रक्रिया (WLTP) के आधार पर अधिक कठोर CO₂ उत्सर्जन लक्ष्य प्रस्तावित किए गए हैं।
- मांग एवं उत्पादन प्रोत्साहनों, स्थानीयकरण नीतियों तथा प्रारंभिक चार्जिंग अवसंरचना के साथ भारत ईवी विकास के निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
- भारत स्वयं को आयात-निर्भर बाज़ार से बदलकर ईवी उत्पादन के वैश्विक प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है।
- यह ऊर्जा सुरक्षा, तेल आयात में कमी तथा 2070 तक शुद्ध-शून्य (Net Zero) लक्ष्य प्राप्त करने की राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
स्रोत: PIB
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